तासु बिरोध न कीजिअ नाथा
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा
चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा॥ ५ ॥
अर्थ
हे नाथ! उनका विरोध न कीजिये, जिनके हाथ में काल, कर्म और जीव सभी हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश