अति बल मधु कैटभ जेहिं मारे

चौपाई ४, दोहा ६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अति बल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे॥ जेहिं बलि बाँधि सहसभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा॥ ४ ॥

अर्थ

[विष्णुरूप से] अत्यन्त बलवान् मधु और कैटभ [दैत्य] मारने वाले; [वराह और नृसिंहरूप से] महावीर दिति के पुत्रों का संहार करने वाले; [वामनरूप से] जिन्होंने बलि को बाँधकर सहस्रबाहु को मारा, वे ही [भगवान्] पृथ्वी का भार हरने के लिये [रामरूप में] अवतीर्ण (प्रकट) हुए हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का रावण को उपदेश