रामहि सौंपि जानकी नाइ कमल पद

दोहा ६ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

रामहि सौंपि जानकी नाइ कमल पद माथ। सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ॥ ६ ॥

अर्थ

[श्रीरामजी के] चरणकमलों में सिर नवाकर (उनकी शरण में जाकर) उनको जानकीजी सौंप दीजिये और आप पुत्र को राज्य देकर वन में जाकर श्रीरघुनाथजी का भजन कीजिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का दोहा ६ है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का रावण को उपदेश