तब रघुपति रावन के सीस भुजा

दोहा ९७ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप। काटे बहुत बढ़े पुनि जिमि तीरथ कर पाप॥ ९७ ॥

अर्थ

तब श्रीरघुनाथजी ने रावण के सिर, भुजाएँ, बाण और धनुष काट डाले। पर वे फिर बहुत बढ़ गये, जैसे तीर्थ में किये हुए पाप बढ़ जाते हैं (कई गुना अधिक भयानक फल उत्पन्न करते हैं) !।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का दोहा ९७ है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
घोर युद्ध, रावण की मूर्छा