गहि भूमि पार् यो लात मार्
गहि भूमि पार् यो लात मार्
छन्द, दोहा ९७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
गहि भूमि पार्यो लात मार्यो बालिसुत प्रभु पहिं गयो। संभारि उठि दसकंठ घोर कठोर रव गर्जत भयो॥ करि दाप चाप चढ़ाइ दस संधानि सर बहु बरषई। किए सकल भट घायल भयाकुल देखि निज बल हरषई॥
अर्थ
उसे पकड़कर पृथ्वी पर गिराकर लात मारकर बालिसुत अंगद प्रभु के पास चले गये। रावण सँभलकर उठा और बड़े भयानक कठोर शब्द से गरजने लगा। वह दर्प करके दसों धनुष चढ़ाकर उन पर बहुत-से बाण सन्धान करके बरसाने लगा। उसने सब योद्धाओं को घायल कर दिया और भयाकुल कर दिया तथा अपना बल देखकर वह हर्षित होने लगा॥
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का छन्द, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।
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घोर युद्ध, रावण की मूर्छा