तब मारुतसुत मुठिका हन्यो
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो
चौपाई ४, दोहा ६५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर्यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो॥ पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता॥ ४ ॥
अर्थ
तब मारुतसुत ने उसे एक घूँसा मारा; जिससे वह व्याकुल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा और सिर पीटने लगा। फिर उसने उठकर हनुमानजी को मारा! वे चक्कर खाकर तुरंत ही पृथ्वी पर गिर पड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति