पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि

चौपाई ५, दोहा ६५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि॥ चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई॥ ५ ॥

अर्थ

फिर उसने नल-नील को पृथ्वी पर पछाड़ दिया और दूसरे योद्धाओं को भी जहाँ-तहाँ पटक-पटककर डाल दिया। वानर सेना भाग चली। सब अत्यन्त भयभीत हो गये, कोई सामने नहीं आता।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति