तब कपीस रिच्छेस बिभीषन

चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन॥ करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा॥ २ ॥

अर्थ

तब वानरराज सुग्रीव, ऋक्षपति जाम्बवानु और विभीषण ने हृदय में सूर्यकुल के भूषण श्रीरघुनाथजी का स्मरण किया और विचार करके उन्होंने कर्तव्य निश्चित किया। वानरों की सेना के चार दल बनाये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद के लौटने पर राम-मंत्रणा और लंका पर चतुर्दिक आक्रमण की रणनीति का वर्णन है।

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अंगद-राम-संवाद