सुरसरि नाघि जान तब आयो

चौपाई ४, दोहा १२१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो॥ तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी॥ ४ ॥

अर्थ

इतने में ही विमान गंगा को लाँघकर [इस पार] आ गया और प्रभु की आज्ञा पाकर वह किनारे पर उतरा। तब सीताजी ने बहुत प्रकार से गंगा जी की पूजा करके फिर उनके चरणों पर गिरी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान