मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी

चौपाई ३, दोहा १२१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी॥ इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए॥ ३ ॥

अर्थ

दोनों हाथ जोड़कर तथा मुनि के चरणों की वन्दना करके प्रभु विमान पर चढ़कर फिर (आगे) चले। यहाँ जब निषादराज ने सुना कि प्रभु आ गये, तब उसने “नाव कहाँ है? नाव कहाँ है?” पुकारते हुए लोगों को बुलाया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान