सुनि सुत बचन भरोसा आवा
सुनि सुत बचन भरोसा आवा
चौपाई ४, दोहा ४९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा॥ करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा॥ ४ ॥
अर्थ
पुत्र के वचन सुनकर रावण को भरोसा आ गया। उसने प्रेम के साथ उसे अंक में बैठा लिया। विचार करते-करते ही सबेरा हो गया। वानर फिर चारों दरवाजों पर जा लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।
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माल्यवान का रावण को समझाना