कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा
चौपाई ५, दोहा ४९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा॥ बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए॥ ५ ॥
अर्थ
वानरों ने क्रोध करके दुर्गम किले को घेर लिया। नगर में बहुत ही कोलाहल (शोर) मच गया। राक्षस बहुत तरह के अस्त्र-शस्त्र धारण करके दौड़े और उन्होंने किले पर से पहाड़ों के शिखर ढहाये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।
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माल्यवान का रावण को समझाना