सुनि कठोर बानी कपि केरी
सुनि कठोर बानी कपि केरी
चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी॥ खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ॥ २ ॥
अर्थ
वानर (अंगद) की कठोर वाणी सुनकर रावण आँखें तरेरकर (तिरछी करके) बोला--अरे दुष्ट! मैं तेरे सब कठोर वचन इसीलिये सह रहा हूँ कि मैं नीति और धर्म को जानता हूँ (उन्हींकी रक्षा कर रहा हूँ)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद