सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन
दोहा ५६ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार। राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार॥ ५६ ॥
अर्थ
यह उसकी बातें सुनकर रावण बहुत ही क्रोधित हुआ। तब कालनेमी ने मन में विचार किया कि [इसके हाथ से मरने की अपेक्षा] श्रीरामजी के दूत के हाथ से ही मरूँ तो अच्छा है। यह दुष्ट तो पापसमूह में रत है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ५६ है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।
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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान