सुनत बचन उठि बैठ कृपाला

चौपाई ४, दोहा ८४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला॥ पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए॥ ४ ॥

अर्थ

ये वचन सुनते ही कृपालु लक्ष्मणजी उठ बैठे। वह कराल शक्ति आकाश को चली गयी। लक्ष्मणजी फिर धनुष-बाण लेकर दौड़े और बड़ी शीघ्रता से शत्रु के सामने आ पहुँचे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध