सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा

चौपाई ८, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा॥ छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा॥ ८ ॥

अर्थ

कोसलाधीश श्रीरामजी के प्रताप का स्मरण करके लक्ष्मणजी ने दर्पपूर्वक बाण का संधान किया। बाण छोड़ते ही वह उसकी छाती के बीच लग गया। मरते समय उसने सब कपट त्याग दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।

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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार