देखि अजय रिपु डरपे कीसा
देखि अजय रिपु डरपे कीसा
चौपाई ७, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा॥ लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा॥ ७ ॥
अर्थ
शत्रु को पराजित न होता देखकर वानर डरे। तब सर्पराज बहुत ही क्रोधित हुआ। लक्ष्मणजी ने मन में यह मंत्र दृढ़ किया कि इस पापी को मैं बहुत खेला चुका हूँ।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार