रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि
दोहा ७६ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान। धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान॥ ७६ ॥
अर्थ
राम के छोटे भाई लक्ष्मण कहाँ हैं? राम कहाँ हैं? ऐसा कहकर उसने प्राण छोड़ दिये। अंगद और हनुमान कहने लगे—धन्य धन्य तेरी जननी कह [जो तू लक्ष्मणजी के हाथों मरा और मरते समय श्रीराम-लक्ष्मण को स्मरण करके तूने उनके नामों का उच्चारण किया]।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का दोहा ७६ है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार