सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू
चौपाई ३, दोहा ४० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू॥ उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना॥ ३ ॥
अर्थ
और बोला-- हे वीरो! सब लोग चारों दिशाओं में जाओ और रीछ-वानर सबको पकड़-पकड़कर खाओ। हे उमा! रावण को ऐसा अभिमान था जैसे टिटिहिरी पक्षी पैर ऊपर की ओर करके सोता है [मानो आकाश को थाम लेगा]।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ