आए कीस काल के प्रेरे
आए कीस काल के प्रेरे
चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे॥ अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठें अहार बिधि दीन्हा॥ २ ॥
अर्थ
बंदर काल की प्रेरणा से चले आये हैं। मेरे राक्षस सभी भूखे हैं। विधाता ने इन्हें घर बैठे भोजन भेज दिया। ऐसा कहकर उस मूर्ख ने अट्टहास किया (वह बड़े जोर से ठहाका मारकर हँसा)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ