चले निसाचर आयसु मागी
चले निसाचर आयसु मागी
चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी॥ तोमर मुद्गर परसु प्रचंडा। सूल कृपान परिघ गिरिखंडा॥ ४ ॥
अर्थ
आज्ञा माँगकर राक्षस चले, और हाथों में उत्तम भिंदिपाल, साँगी (बरछी) लिए। तोमर, मुद्गर, प्रचण्ड फरसे, शूल, कृपाण, परिघ और गिरिखण्डा भी थे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ