सिर अरु सैल कथा चित रही

चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही॥ सो भुजबल राखेहु उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली॥ ४ ॥

अर्थ

सिर काटने और कैलास उठाने की कथा चित्तमें चढ़ी हुई थी, इससे तूने उसे बीसों बार कहा। भुजाओं के उस बल को तो तूने हृदय में ही टाल रखा है, जिससे तूने सहस्रबाहु, बलि और बालि को जीता था।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद