सुनु मतिमंद देहि अब पूरा
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा
चौपाई ५, दोहा २९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा॥ इंद्रजालि कहुँ कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा॥ ५ ॥
अर्थ
ओरे मन्दबुद्धि! सुन, अब बस कर। सिर काटनेसे भी क्या कोई शूरवीर हो जाता है ? इन्द्रजाल रचनेवालेको वीर नहीं कहा जाता, यद्यपि वह अपने ही हाथों अपना सारा शरीर काट डालता है !।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
अंगद का लंका में रावण से संवाद