कह अंगद सलज्ज जग माहीं

चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं॥ लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ॥ ३ ॥

अर्थ

अंगदने कहा--अरे रावण! तेरे समान लज्जावान् जगत् में कोई नहीं है। लजाशीलता तो तेरा सहज स्वभाव ही है। तू अपने मुँहसे अपने गुण कभी नहीं कहता।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद