श्रीरामचरित की महिमा

इस समापन भाग में श्रीरामचरित के श्रवण और मनन की महिमा कही गई है। भक्तिभाव से इसका पाठ करने पर भय, शोक और दोष दूर होकर मंगल की प्राप्ति होती है।

लंकाकाण्ड · प्रकरण ३७ / ३७

प्रकरण पाठ

दोहा

समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान। बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान॥ १२१ (क) ॥

अर्थ:

जो सुजान लोग श्रीरघुवीर की समरविजय सम्बन्धी लीलाएँ सुनते हैं, उनको भगवान् नित्य विजय, विवेक और विभूति (ऐश्वर्य) देते हैं।

दोहा

यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु बिचार। श्रीरघुनाथ नाम तजि नाहिन आन अधार॥ १२१ (ख) ॥

अर्थ:

अरे मन! विचार करके देख! यह कलिकाल पापों का घर है। इसमें श्रीरघुनाथजी के नाम को छोड़कर [पापों से बचने के लिये] दूसरा कोई आधार नहीं है।