यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु

दोहा १२१ (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु बिचार। श्रीरघुनाथ नाम तजि नाहिन आन अधार॥ १२१ (ख) ॥

अर्थ

अरे मन! विचार करके देख! यह कलिकाल पापों का घर है। इसमें श्रीरघुनाथजी के नाम को छोड़कर [पापों से बचने के लिये] दूसरा कोई आधार नहीं है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का दोहा १२१ (ख) है। इस प्रकरण में श्रीरामचरित के श्रवण-मनन और रघुनाथ नाम की महिमा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीरामचरित की महिमा