सयन करहु निज निज गृह जाई

चौपाई ३, दोहा १४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई॥ मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ॥ ३ ॥

अर्थ

अपने-अपने घर जाकर सो रहो [डरने की कोई बात नहीं है] तब सब लोग सिर नवाकर घर गये। जब से कर्णफूल पृथ्वी पर गिरा, तब से मन्दोदरी के हृदय में सोच बस गया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

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मंदोदरी का राम-महिमा कथन