सर समूह सो छाड़ै लागा
सर समूह सो छाड़ै लागा
चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सर समूह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा॥ जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर॥ ३ ॥
अर्थ
वह बाणों के समूह छोड़ने लगा। मानो बहुत-से पंखवाले साँप दौड़े जा रहे हों। जहाँ-तहाँ वानर गिरते दिखायी पड़ने लगे। उस समय कोई भी उसके सामने न हो सके।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।
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माल्यवान का रावण को समझाना