कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही

चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही॥ अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने॥ २ ॥

अर्थ

भाई से द्रोह करनेवाला विभीषण कहाँ है? आज मैं सब को और उस दुष्ट को तो हठपूर्वक (अवश्य ही) मारूँगा। ऐसा कहकर उसने धनुष पर कठिन बाणों का सन्धान किया और अत्यन्त क्रोध करके उसे कान तक खींचा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना