सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो
सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो
चौपाई २, दोहा ११६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सकुल सदल प्रभु रावन मार्यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार्यो॥ दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती॥ २ ॥
अर्थ
आपने कुल और सेनासहित रावण का वध किया, त्रिभुवन में अपना पवित्र यश फैलाया और मुझ दीन, पापी, बुद्धिहीन और जातिहीन पर बहुत प्रकार से कृपा की।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण की प्रार्थना, राम की अयोध्या-आतुरता” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण की प्रार्थना और भरतजी की विरह-दशा स्मरण कर राम की अयोध्या लौटने की आतुरता का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
विभीषण की प्रार्थना, राम की अयोध्या-आतुरता