सक्ति सूल तरवारि कृपाना
सक्ति सूल तरवारि कृपाना
चौपाई १, दोहा ७३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना॥ डारइ परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना॥ १ ॥
अर्थ
वह शक्ति, शूल, तलवार, कृपाण आदि अस्त्र, शस्त्र एवं वज्रायुध आदि बहुत-से आयुध चलाने तथा फरसे, परिघ, पत्थर आदि डालने और बहुत-से बाणों की वृष्टि करने लगा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना