मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास

दोहा ७२ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास। गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास॥ ७२ ॥

अर्थ

मेघनाद उसी (पूर्वोक्त) मायामय रथ पर चढ़कर आकाश में चला गया और अट्टहास करके गरजा, जिससे वानरों की सेना में भय छा गया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का दोहा ७२ है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना