सकरुन बचन सुनत भगवाना
सकरुन बचन सुनत भगवाना
चौपाई ३, दोहा ७० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना॥ राम सेन निज पाछें घाली। चले सकोप महा बलसाली॥ ३ ॥
अर्थ
करुणाभरे वचन सुनते ही भगवान् धनुष-बाण सुधारकर चले। महाबलशाली श्रीरामजी ने सेना को अपने पीछे कर लिया और वे [अकेले] क्रोधपूर्वक चले (आगे बढ़े)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति