खैंचि धनुष सर सत संधाने

चौपाई ४, दोहा ७० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने॥ लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा॥ ४ ॥

अर्थ

उन्होंने धनुष को खींचकर सौ बाण सन्धान किये। बाण छूटे और उसके शरीर में समा गये। बाणों के लगते ही वह क्रोध में भरकर दौड़ा। उसके दौड़ने से पर्वत डगमगाने लगे और पृथ्वी हिलने लगी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति