बहुरि राम जानकिहि देखाई

चौपाई ३, दोहा १२० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई॥ पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता॥ ३ ॥

अर्थ

फिर श्रीरामजी ने जानकीजी को कलियुग के पापों का हरण करनेवाली सुहावनी यमुनाजी के दर्शन कराये। फिर पवित्र गंगाजी के दर्शन किये। श्रीरामजी ने कहा—हे सीते! इन्हें प्रणाम करो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान