साहस अनृत चपलता माया

चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया॥ रिपु कर रूप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा॥ २ ॥

अर्थ

साहस, अनृत, चपलता, माया (छल), भय (डरपोकपन), अविवेक (मूर्खता), अपवित्रता और निर्दयता। तूने शत्रु का समग्र (विराट) रूप गाया और मुझे उसका बड़ा भारी भय सुनाया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

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मंदोदरी का राम-महिमा कथन