सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेहिं बूझा
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेहिं बूझा
चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेहिं बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा॥ कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा॥ ४ ॥
अर्थ
सभा में आकर उसने मन्त्रियों से पूछा कि शत्रु के साथ किस प्रकार से युद्ध करना होगा? मन्त्री कहने लगे-हे राक्षसों के नाथ! हे प्रभु! सुनिये, आप बार-बार क्या पूछते हैं?।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश