कहहु कवन भय करिअ बिचारा
कहहु कवन भय करिअ बिचारा
चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा॥ ५ ॥
अर्थ
कहिये तो [ऐसा] कौन-सा बड़ा भय है, जिसका विचार किया जाय? (भय की बात ही क्या है?) मनुष्य और वानर-भालू तो हमारे भोजन [की सामग्री] हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश