सब मिलि देहिं रावनहि गारी
सब मिलि देहिं रावनहि गारी
चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी॥ निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना॥ ३ ॥
अर्थ
सब मिलकर रावण को गालियाँ देने लगे कि राज्य करते हुए इसने मृत्यु को बुला लिया। रावण ने जब अपनी सेना का विचलित होना कानों से सुना, तब [भागते हुए] योद्धाओं को लौटाकर वह क्रोधित होकर बोला--
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ