चले निसाचर निकर पराई
चले निसाचर निकर पराई
चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई॥ हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी॥ २ ॥
अर्थ
राक्षसों के झुंड वैसे ही भाग चले जैसे जोर की हवा चलने पर बादलों के समूह तितर-बितर हो जाते हैं। लंका नगरी में बड़ा भारी हाहाकार मच गया। बालक, स्त्रियाँ और रोगी [असमर्थता के कारण] रोने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ