जो रन बिमुख सुना मैं काना
जो रन बिमुख सुना मैं काना
चौपाई ४, दोहा ४२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना॥ सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना॥ ४ ॥
अर्थ
मैं जिसे रण से पीठ देकर भागा हुआ अपने कानों सुनूँगा, उसे स्वयं भयानक कृपाण से मारूँगा। मेरा सब कुछ खाया, भाँति-भाँति के भोग किये और अब रणभूमि में प्राण प्यारे हो गये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ