सब के बचन श्रवन सुनि कह

दोहा ८ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि। नीति बिरोध न करिअ प्रभु मंत्रिन्ह मति अति थोरि॥ ८ ॥

अर्थ

कानों से सबके वचन सुनकर प्रहस्त हाथ जोड़कर कहने लगा-हे प्रभु! नीति के विरुद्ध नहीं करना चाहिए, मन्त्रियों में बहुत ही थोड़ी बुद्धि है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का दोहा ८ है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को उपदेश