कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती
कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती
चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती॥ बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा॥ १ ॥
अर्थ
ये सभी मूर्ख (खुशामदी) मन्त्री ठकुरसुहाती (मुँहदेखी) कह रहे हैं। हे नाथ! इस प्रकार की बातों से काम पूरा नहीं पड़ेगा। एक ही बंदर समुद्र लाँघकर आया था। उसका चरित्र सब लोग अब भी मन-ही-मन गाया करते हैं (स्मरण किया करते हैं)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का रावण को उपदेश