सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ

चौपाई ४, दोहा ११६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ॥ सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला॥ ४ ॥

अर्थ

हे नाथ! मुझे सब प्रकार से अपना लीजिये और फिर हे प्रभो! मुझे साथ लेकर अयोध्यापुरी को पधारिये। विभीषणजी के कोमल वचन सुनते ही दीनदयालु प्रभु के दोनों विशाल नेत्रों में [प्रेमाश्रुओं का] जल भर आया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “विभीषण की प्रार्थना, राम की अयोध्या-आतुरता” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण की प्रार्थना और भरतजी की विरह-दशा स्मरण कर राम की अयोध्या लौटने की आतुरता का वर्णन है।

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विभीषण की प्रार्थना, राम की अयोध्या-आतुरता