सब बिधि कुसल कोसलाधीसा

चौपाई ४, दोहा १०७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा॥ अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो॥ ४ ॥

अर्थ

हे माता! कोसलपति श्रीरामजी सब प्रकार से सकुशल हैं। उन्होंने संग्राम में दस सिर वाले रावण को जीत लिया है और विभीषण ने अचल राज्य प्राप्त किया है। हनुमानजी के वचन सुनकर सीताजी के हृदय में हर्ष छा गया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।

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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा