साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ

दोहा ३५ (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरीं रावनहि बहुरि कहा समुझाइ॥ ३५ (ख) ॥

अर्थ

संध्या हो गयी जानकर दशग्रीव विलखता हुआ (उदास होकर) महल में गया। मन्दोदरी ने रावण को समझाकर फिर कहा--।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा ३५ (ख) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद