रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय

दोहा ३५ (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज। पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज॥ ३५ (क) ॥

अर्थ

शत्रु के बल का मर्दन कर, बल की राशि बालिपुत्र अंगदजी ने हर्षित होकर श्रीरामचन्द्रजी के चरणकमल पकड़ लिये। उनका शरीर पुलकित है और नेत्रों में [आनन्दाश्रुओं का] जल भरा है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा ३५ (क) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद