रे कपि अधम मरन अब चहसी
रे कपि अधम मरन अब चहसी
चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी॥ कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें॥ ४ ॥
अर्थ
अरे नीच बंदर! अब तू मरना ही चाहता है! इसी से छोटे मुँह बड़ी बात कहता है। अरे मूर्ख बंदर! तू जिसके बल पर कड़वे वचन बक रहा है, उसमें बल, प्रताप, बुद्धि अथवा तेज कुछ भी नहीं है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
अंगद का लंका में रावण से संवाद