अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता
अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता
दोहा ३१ (क) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास। सोदुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास॥ ३१ (क) ॥
अर्थ
उसे गुणहीन और मानहीन समझकर ही तो पिता ने वनवास दिया। उस पर उसका दुःख, युवती स्त्री के विरह और फिर रात-दिन मेरा त्रास बना रहता है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा ३१ (क) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद