रावनु रथी बिरथ रघुबीरा

चौपाई १, दोहा ८० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा॥ अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा॥ १ ॥

अर्थ

रावण को रथ पर और श्रीरघुवीर को बिना रथ के देखकर विभीषण अधीर हो गये। प्रेम अधिक होने से उनके मन में सन्देह हो गया [कि वे बिना रथ के रावण को कैसे जीत सकेंगे]। श्रीरामजी के चरणों की वन्दना करके वे स्नेहपूर्वक कहने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ